31 Jul 2013

Rangrez...


रंगों से बनी, फूलों सी नाज़ुक है वो मनचली,
नाचती आँखों से देखे वो दुनिया,
थिरकते क़दमों से वो नापे दुनिया,
छु कर भागे तो मौसम रंग बदले,
मुकुराए तो भँवरे हो बावरे।

हो के मगन जब गाये वो,
बदरा बिखरे, भिगायें उसके आँचल को,
दस्तक दे नए यौवन को, 
परी सी उड़े वो, मदमस्त तितली सी वो,
है अनोखी, अनछुई सी, 
सखी वो मेरी या मेरी ही परछाई।

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देखो वो खोये न कहीं, मन के  किसी कोने में,
छुपा लो उसे दिल में कहीं, मिल जाए तुमसे वो,
गर कहीं यूँ ही, तो  बचा लेना उसे,
सबकी नज़रों से दूर, रखना उसे संजो के,
परी है वो जो आई है सिर्फ तुम्हारे लिये।


After almost five years, I am writing in Hindi again. It's beautiful and makes me think from heart again. Hope you like it. Blessed be.